Expression of Ethos and Ideology....
हमारे प्रकाशन

स किताब के प्रथम अध्याय में बिहार और झारखंड की प्राथमिक शिक्षा, सर्वशिक्षा और साक्षरता के संदर्भ में दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। दूसरे अध्याय में झारखंड के अनुसूचित जनजातीय आवासीय विद्यालयों का मूल्यांकन है। तीसरा अध्याय में बालिका शिक्षा के सार्वजनीकरण की दशा-दिशा से संबंधित है। चौथे अध्याय में कुकुरमुत्तों जैसे फैलते निजी स्कूलों की तस्वीर है। पांचवे अध्याय में बिहार के प्राथमिक शिक्षा के सच का उल्लेख है तो आखिरी अध्याय में झारखंड में प्रचलित सहभागी प्राथमिक शिक्षा प्रबंधन में ग्राम शिक्षा समितियों की भूमि का आकलन है।

पुस्तक का नाम : अधूरी शिक्षा का पूरा सच

संपादक : हेमंत/शेखर

मूल्य : पेपर बैक - रु. 70.00, सजिल्द - रु. 150.00 (पृष्ठ संख्या : 188 साई : 13.5x21 से.मी.)

यह पुस्तक एक रिपोर्ट है, जो क्रेज, झारखंड के सर्वेक्षण व विश्लेषण पर आधरित है। इस रिपोर्ट में झारखंड में जो स्कूली शिक्षा प्रणाली है, उसकी मौजूदा स्थिति की संतुलित समीक्षा की गई है। इसमें यह विचार विमर्श है कि आखिर मौजूदा निराशाजनक परिस्थति क्यों बन रही और यह बताने की कोशिश भी है कि इसमें सुधार लाने के लिये क्या किया जा सकता है।
पुस्तक का नाम : झारखंड : प्राथमिक शिक्षा हालात
संपादन : क्रेज शोध समूह
 मूल्य : रु. 30.00 पृष्ठ संख्या : 84  पृष्ठ साइज : 13.5 X 21 से.मी.

यह पुस्तक वर्तमान की वैश्विक परिस्थितियों के विश्लेषण का प्रयास करती है और साथ ही वास्तविक भूमंडलीकरण की अवधारणा की तलाश करती है। पुस्तक में उपनिवेशवाद से मुक्त देशों की जनता के देशज संघर्ष एवं ज्ञान की स्वीकृति है। मौजूदा भूमंडलीकरण पूरी दुनिया में साम्राज्यवाद देशों की षडयंत्रकारी एकरूपता कायम करना चाहता है, जबकि यह पुस्तक की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विधिवता का समर्थन करती है।

पुस्तक का नाम : दूसरा भूमंडलीकरण संभव है

संपादक : योगेन्द्र/राज वल्लभ/हेमंत

मूल्य : पेपर बैक : रु. 50.00, सजिल्द : रु. 75.00 पृष्ठ साइज : 13.5 X 21 से.मी.

झारखंड प्रोफाइल सदियों से जीवंत गणसमाज का ऐसा दस्तावेज है जो आधुनिकता के वर्तमान दौर में समाज एवं इलाके के आंतरिक विवेचना की दृष्टि देता है। विकास के देशज सपनों को जमीन पर उतारने का परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। पठार की संपदा का प्रोफाइल सृजन के नए रास्ते गढ़ने के लिए तथ्यगत सच्चाइयों की दस्तक देता है। झारखंड की शक्ति जनश्रम एवं प्राकृतिक संपदा का संपुंजन है - झारखंड प्रोफाइल

पुस्तक का नाम : झारखंड प्रोफाइल

संपादक : प्रवीर

मूल्य : रु. 30.00 पृष्ठों संख्या : 140   पृष्ठ साइज : 12 X 18 से.मी.

इस पुस्तिका की रचना बाढ़-सुखाड़ मुक्ति आंदोलन द्वारा वर्ष 2005 में आयोजित कार्यशाला में शामिल प्रतिनिधियो, विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत अनुभवों के आधार पर की गयी है। यह पुस्तिका सत्ता, योजनाकार, समाजकर्मी और बाढ़ से जूझ रहे आम जन के लिए उपयोगी है।

पुस्तक का नाम : मरता पानी, मारता पानी

संपादक : हेमंत / राज वल्लभ

मूल्य : रु. 10.00 पृष्ठ साइज : 13.5 X 21 से.मी. पृष्ठ संख्या : 56

 

'नई शिक्षा की बारह खड़ी' ग्लोबल दुनिया में देशज आकांक्षा का दस्तक है और शिक्षा पर विशिष्ट विमर्श का पहलू भी। यह पुस्तक शिक्षा-विमर्श का एक अनिवार्य 'हैंड बुक' है जो जीवन, प्रकृति, विज्ञान और संस्कृति के संतुलन को विमर्श का केन्द्र मानता है।

पुस्तक का नाम : नई शिक्षा की बारह खड़ी

मूल्य : रु. 30.00 पृष्ठ साइज : 13.5 X 21 से.मी. पृष्ठ संख्या : 80

 

यह पुस्तक सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए हैंड बुक जैसा है। इस पुस्तक में झारखंड राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का पूर्ण दस्तावेज है। इसमें 12 अधयाय हैं जिसमें योजना का उद्देश्य, उपयोग, कार्यान्वयन, प्रबंधन, पंजीयन, काम व उसका निष्पादन, मजदूरी का भुगतान/बेरोजगारी भत्ता आदि पर चर्चा है।

पुस्तक का नाम : झारखंड राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

           झारखंड सरकार, ग्रामीण विकास विभाग, रांची         

       मूल्य : रु. 20.00 पृष्ठ साइज : 13.5 X 21 से.मी.  पृष्ठ संख्या : 120

 

इस पुस्तक में झारखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य की प्रस्तुति अत्यंत रोचक है। झारखंड की आर्थिक दशा एव संभावनाओं पर सरकारी आंकड़ों के आधार पर तर्कपूर्ण शैली में विमर्श किया गया है। 'विजन झारखंड' से लेकर 'आगे क्या होने वाला है' जैसे विषयों पर चर्चा कर कई सार्थक प्रश्न पेश किये गये हैं। ये प्रश्न झारखंड के विद्यार्थियों, युवाओं और अध्येताओं सहित प्रजा और प्रभुवर्ग में 'झारखंड की मौलिक पहचान से जुड़े विकास' के लिए तत्काल विमर्श, विस्तृत शोध व गंभीर चिंतन की 'बेचैनी' पैदा कर सकते हैं। ये सवाल समाधान के लिए नयी दृष्टि की जरूरत की रेखांकित करते हैं।

पुस्तक का नाम : विकास के इस मोड़ पर झारखंड

लेखक : हेमंत संपादक : शिशिर टुडू

मूल्य : रु. 15.00   पृष्ठ संख्या : 64  पृष्ठ साइज : 13.5 X  21 से.मी.

आठ अध्यायों में लिखित 'लोहिया जांच आयोग रिपोर्ट-1950' का यह नव संस्करण दो दस्तावेजों आधार पर तैयार किया गया है। एक तो 'मैन काइंड' पत्रिका के फरवरी-मार्च, 1970 के अंक में 'लोहिया क्लासिक्स' स्तम्भ के तहत अंग्रेजी में प्रकाशित आलेख 'चम्पारण : में गांधी टू लोहियाहै और दूसरा है चम्पारण में समाजवादी नेता रामानंद तिवारी के नेतृत्व में चले 'लालगढ़ सत्याग्रह' में शामिल श्री लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता के 'लेटर पैड' पर हिंदी में दर्ज 'लोहिया जांच आयोग : चम्पारण समस्या के कुछ तथ्यात्मक पहलू'

उस आउट ऑफ प्रिन्ट होकर दुर्लभ हो चुकी पुस्तिका की एक हस्तलिखित कॉपी श्री लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता ने 1977 में तैयार की। देशज प्रकाशन ने अंग्रेजी में प्रकाशित आलेख और उस हस्तलिखित हिंदी सामग्री के तथ्य व कथ्य में यथासंभव मेल बिठाते हुए दुर्लभ दस्तावेजी सामग्री के नव संस्करण के रूप में यह रिपोर्ट तैयार किया है।

पुस्तक का नाम : लोहिया आयोग रिपोर्ट

संपादन : पंकज, पश्चिम चम्पारण

मूल्य : 15.00 रुपये साईज : 13.5 X 21 से.मी. पृष्ठ संख्या : 52

रेणुका वर्मा के इस कविता-संग्रह में बचपन की केवल स्मृतियाँ नहीं हैं। वे एक बार ‍िफर से अपने बचपन में लौटकर अपनी स्मृतियों के सहारे उन बिम्बों, रंगों एवं दृश्यों को सहज-सरल, संप्रेषणीय एवं लययुक्त भाषा में प्रस्तुत करती हैं, जो उनसे छूट चुके हैं। ये कविताएं किसी भी रूप में किसी वयस्क, परिपक्व एवं चिंतनशील व्यक्ति द्वारा रचित होने का अहसास नहीं कराती हैं और यही इन कविताओं की अपनी विशेषता है। बाल मन में प्रवेश कर लिखी गयी इन कविताओं का विषय धर्ती से आकाश तक फैला हुआ है, जहां हरियाली और इन्द्रध्नुष है। यहां इतिहास नहीं, भूगोल और वर्तमान है। सरल, सहज, सुंदर और चमकदार कविताएं। बच्चों का संसार असीमित है। वह इन्द्रधनुष का सतरंगा संसार है। स्वभाविक है इस संसार में कोयल, मैना, तोता, बुलबुल, मोर, पपीहा, मेढक, सियार, बिल्ली, खरगोश, चूहा और हाथी दादा हो। मुनष्य के संसार में जब पशु-पक्षी, प्रकृति, वन-जंगल, गीत-संगीत नहीं हो, तो वह संसार ऊपर से जितना चमकीला दिखाई दे, भीतर से काला और बदरंग होता है।
पुस्तक का नाम : बचपन के दिन
  संपादक : रेणुका वर्मा   मूल्य : 30.00 रुपये  पृष्ठ संख्या : 36    साईज : 13.5 X 21.5 से.मी.

भारतीय संविधन के मुताबिक धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थल के आधार पर किसी नागरिक के साथ भेद-भाव नहीं किया जाता. संविधान ने महिलाओं को जीवन के सभी क्षेत्रों में समानता के अधिकार तो दिये पर वास्तविकता इससे परे है. समानता के अधिकार के बाद भी महिलाओं के साथ हर स्तर पर विभेद चलता रहा. सती-कानून, विधवा-विवाह कानून, बाल-विवाह प्रतिबंध् कानून, दहेज-निरोधक कानून, समान-मजदूरी कानून आदि के होते भी महिलाओं के शोषण का सिलसिला निरंतर जारी है एवं इन कानूनों के उल्लंघन की घटनाएं आये दिन देखने सुनने को मिलती है. कानून के पालन की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन के साथ-साथ जनता की भी होती है. कोई कानून बनाने का लाभ तभी हो सकताहै जब  जनता जागरूक हो. इसके लिए जरूरी है कि महिला अपने अधिकार को जाने एवं पहचाने.
पुस्तक का नाम :  महिला अधिकार
संपादन :  श्रावणी
मूल्य : 15.00 रुपये  पृष्ठ संख्या : 56   साईज : 13.5 X 21.5 से.मी.

डॉ. रोज केरकेट्टा की कहानियों से होकर गुजरने वाले पाठकों के सामने ऐसे कई जटिल प्रश्न सहज-स्वाभाविक जिज्ञासा बनकर उपस्थित हो जाते हैं।
प्रस्तुत कहानियों में डॉ. रोज केरकेट्टा ने सरल आदिवासी के रहस्यमय समझे जानेवाले उस भाव-संसार का सफल चित्राण किया है जो मुख्यधरा के बौद़िक जगत में 'ट्राइबल इथोज' के रूप में जाना जाता है।

इस कहानी संग्रह की कहानियों में लेखिका ने अभिव्यक्ति की जिस शैली का प्रयोग किया है, उसका एक अलग अंदाज और मजा है, जिसे झारखंड के ग्रामीण जीवन से परिचित पाठक अधिक सहजता से समझ सकते हैं और अपरिचित पाठकों को भी हर कहानी का कथ्य अपना-सा लगता है।
पुस्तक का नाम :
पगहा जोरी-जोरी रे घाटो
संपादक : रोज केरकेट्टा
मूल्य : 150.00    पृष्ठ संख्या : 144   साईज : 14 X 22 से.मी.

सदियों से पहाड़िया समुदाय खाद्य - पदार्थ एवं नगदी पफसल के रूप में बरबट्टी का उपयोग करते रहे हैं. इनके सांस्कृतिक और धर्मिक अनुष्ठानों में भी बरबट्टी का महत्वपूर्ण स्थान है. बरबट्टी पहाड़िया के साथ इतने करीब से जुड़ा हुआ है कि मृत्यु के बाद भी किसी पहाड़िया का दाह संस्कार बरबट्टी के बिना हो ही नहीं सकता है. बरबट्टी की फसल पहाड़ पर लगाने से लेकर उसे खलिहान तक पहुँचाने में पहाड़िया जनजाति पाँच बार अपने आराधय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं. हर बार की जाने वाली इस पूजा-अर्चना में बस एक ही भाव अन्तर्निहित रहता है कि हमारी फसल (बरबट्टी) को नुकसान न हो, उसकी उपज कम न हो. अन्यथा, हम और हमारे परिवार का जीवन संकट में पड़ जायेगा.
पुस्तक का नाम
: बरबट्टी
संपादन
: दुष्यंत कुमार
मूल्य : 15.00 रुपये पृष्ठ संख्या : 48    साईज : 13.5 X 21.5 से.मी.

कान्ता सुधाकर के शब्द एक सधे हुए कवि की वाणी प्रतीत होती है, मौन की शब्द-यात्रा। संभव है प्रकृति व जीवन की कान्ताजी ने जिस गहराई और आत्मीयता से ग्रहण किया है, वह मधुपुर ही क्यों, संपूर्ण संताल परगना को नया काव्य-उत्कर्ष प्रदान करता है।
जंगलों की अंधाधुंध कटाई, बेरहम कुल्हाड़ी और आरी के विरोध में बिना शोर मचाए कान्ताजी अपनी कविताओं से जो असर पैदा करती हैं, वह हमारे पर्यावरणवादियों के आंदोलनों को अंदर की उष्मा और आग प्रदान करने का काम करेगी। नदी को सखी और अंतत: मां कहती हुई इतनी बड़ी हो जाती हैं, जहां वे रिश्ते, समाज और परिवार के साथ-साथ अपने परिवेश प्रकृति तक की यात्रा कर डालती हैं।
कविताएं पढ़कर आपको लगेगा आपके अंदर कई गुमनाम, मौन, बंद से दरवाजे रोशनी की तरफ खुल रहे हैं...यही तो है कविता।
पुस्तक का नाम
: वह जो नदी है
संपादन
: कान्ता सुधाकर
मूल्य : 125.00 रुपये  पृष्ठ संख्या : 96   साईज : 14 X 22 से.मी.

देशज विकास के झारखंडी सपनों को समझने का एक प्रयास है यह पुस्तक। विनाशकार विकास के पश्चिमी चिंतन और मॉडल को नकार कर झारखंड दिशुम के नवनिर्माण की दिशा में उठी बहस को समेटने की एक कोशिश है यह।
अराजनैतिकरण के इस दौर में राजनीति के अन्त:सूत्र को विकास के अन्त:सूत्र से जोड़कर 'पॉलिटिकल इकोनोमी' को प्रकृति और परंपरा से गूंथकर व्यापक फलक में समझने का एक दिशा संकेत प्रदान करती है।
धारा के विरूद्ध चलने और लड़ने वालों को तर्क, तजबीज और उर्जा प्रदान करते हुए नदियों की अविरल धर और वनों के बासंती बयार से लयबद्ध करने की कोशिश की गई है इसमें!
गुलाम मानसिकता के खिलापफ समता, सामुदायिकता और न्यायशील चेतना के झारखंड मूल्यबोध का एक छोटा-सा दस्तावेज है - विकास पर विमर्श!

पुस्तक का नाम
: झारखंड विकास पर विमर्श  संपादन : घनश्याम
मूल्य : 50.00 रुपये पृष्ठ संख्या : 128  साईज : 13.5 X 21 से.मी.

झारखंड में स्वशासन, स्वायत्तता और सांस्कृतिक अस्मिता की लड़ाई सदियों से जारी है। झारखंड राज्य गठन के बाद तो यह संघर्ष और भी तेज हो गया है क्योंकि लोगों की आकांक्षाएं टूट गयी हैं। लोग निराश हैं तथा एक 'लंबी छलांग' की तैयारी भी कर रहे हैं। स्वशासन की लोकतांत्रिक चेतना इसे प्रेरित करता है।
झारखंड समाज की बुनियादी आधार समानता है। सामुदायिकता, स्त्री-पुरुष समानता और देशज जनतंत्रा इसे विशिष्ट बनाते हैं। एक स्वशासी समाज बाल-अधिकारों की हिफाजत करती है तथा वकालत भी। आज सारी दुनिया में बाल-अधिकारों के लिए संघर्ष तेज है। लोकतंत्र के लिए इसे जरूरी माना जा रहा है।
आज जरूरत है कि वैश्विक स्तर जारी बाल-अधिकार दस्तावेज से हम खुद अवगत हों तथा अपने आस-पास के लोगों को भी अवगत कराएं। देशज जनतांत्रिक स्वशासन इस दिशा में आगे बढ़कर अपनी भूमिका का निर्वाह करेगा।

पुस्तक का नाम : बाल अधिकार
  संपादन : विश्वनाथ
मूल्य : 5.00 रुपये पृष्ठ संख्या : 16  साईज : 13.5 X 21.5 से.मी‍

'मांदर बाजे रे' गीत संकलन झारखंड की सांस्कृतिक विविधता का एकता के रूप में स्थापित करने एवं प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। यह चतुर्थ भाषीय (खोरठा, संथाली, नागपुरी, हिन्दी) गीत संकलन की पहली कड़ी है। इस संकलन को आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए अपार हर्ष हो रहा है। यहां के गीतों में झारखंड की संस्कृति को गहराई से देखने एवं समझने का मौका मिलता है, साथ ही सामाजिक, राजनैतिक, दिशा-निर्देश एवं प्रगति में तथा जनान्दोलन को तेज करने में यहां के गीत हमेशा एक माध्यम बनता रहा है। यहा संकलन जल, जंगल, जमीन एवं भाषा, संस्कृति की रक्षा तथा अधिकार प्राप्ति एवं जनजागरण अभियान एक आह्नान भी है। इस छोटी सी गीत संकलन के द्वारा झारखंड में शांति, एकता, संप्रभुता की रक्षा जैसे मूल्यों को हम जीवंत कर सके, और गांधी, लोहिया, जयप्रकाश, तिलका, सिद़धो-कान्हू, बिरसा जैसे महापुरूषों के सपनों को साकार कर सके इस दिशा में एक प्रयास भी है।
पुस्तक का नाम
: मांदर बाजे रे
संपादन
: घनश्याम/दिनेश/जीवन जगन्नाथ
मूल्य : 25.00 रुपये पृष्ठ संख्या : 57 साईज : 14 X 21 से.मी.

यह पुस्तक 'अक्षर की बरसात' चित्रकथा है।
'संवाद';रांची ने एक फिल्म बनाई है - "अक्षर की बरसात में भरे ज्ञान भंडार"।
उस  ‍िफल्म की पटकथा और 'विजुअल्स' के आधार पर ही 'अक्षर की बरसात' चित्रकथा की यह पुस्तक तैयार की गयी है। चित्रकथा में ‍िफल्म के संवाद भी लिये गये हैं। लेकिन उनमें कुछ जरूरी संशोधान किये गये हैं। स्थिर चित्रों के जरिये कहानी जानने के साथ-साथ पढ़कर मजे-मजे में समझने के लिए 'चित्रकथा' का संपादन किया गया है।
बच्चों के लिए 'संवाद' द्वारा तैयार की गयी वह ‍िफल्म और 'देशज प्रकाशन' द्वारा प्रस्तुत चित्रकथा की यह पुस्तक, दोनों की मूल प्रेरणा व आधार है - 'अधूरी शिक्षा का पूरा सच : सवाल, समस्या, लक्ष्य और चुनौत ' नामक पुस्तक। वह पुस्तक उन बड़ों के लिए है जो साक्षरता एवं शिक्षा के छोटे-बड़े दीपक और मशालों के जरिये समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाना चाहते है।
पुस्तक का नाम : अक्षर की बरसात
संपादक : हेमंत / शिशिर टुडू / शेखर
मूल्य : 40.00 रुपये पृष्ठ संख्या : 24 साईज : 20 X 13.5 से.मी.

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